मेरी यह पुस्तक पूज्य बाऊजी स्व. हीराचंद जी खींवसरा को समर्पित है
जिन्होंने मुझे संसार-धन से अधिक महत्त्वपूर्ण संस्कार-धन दिया, अच्छे
संस्कारों से ओत-प्रोत किया, सिंचित किया, पुष्पित-पल्लवित किया।

Naresh Jain